भारत में 2050 तक पूर्णत: अक्षय ऊर्जा से उत्सर्ग मुक्त बिजली निर्मिती

भारत 2050 में पूर्णत: अक्षय ऊर्जा बिजली प्रणाली पर कार्य कर सकता है। लाप्पीनरान्टा यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (LUT) के द्वारा नए अनुसंधान के निष्कर्श है। अध्ययन के बाद पता चला है कि जिस विकासशील देश में भारी मात्रा में अक्षय करणक्षम स्त्रोत है, उन्हें पाश्चिमात्य देशों के मार्ग पर जाने की आवश्यकता नहीं है। जहाँ पर जीवनमान बढ़ाने के लिए बिजली निर्मिति तथा अन्य उद्योग जुडा हुआ है, किंतु इससे अति उत्सर्ग होता है। विकसनशील देश सीधा अक्षय प्रणाली का प्रयोग करके बिजली निर्मिति कम-से-कम खर्च में कर सकत॓ है।

अक्षय ऊर्जा प्रणाली मुख्यता सौर ऊर्जा और विद्युत बॅटरी पर चलती है। सोलर फोटोवोल्टेिक्स सबसे किफायती बिजली का स्त्रोत है और बॅटरी का फायदा यह है कि रात्रि के समय वह ऊर्जा देने का काम करती है। भारत की बिजली मांग को कवर करने के अलावा, सिस्टम सिमुलेशन तीन दशकों में समुद्री जल अलवणीकरण और सिंथेटिक प्राकृतिक गैस के लिए भी शामिल है।

"भारत जैसे देश, तीन दशक के भीतर पूरी तरह अक्षय ऊर्जा बिजली प्रणाली व्यवस्था में जा सकता है और य॓ प्रणाली वर्तमान की तुलना में आर्थिक रूप से बेहतर कर सकते है। ये यह दर्शाता है कि विकासशील देश अपने आर्थिक विकास में अति उत्सर्जन के गहन चरण को छोड़ सकते हैं। यह विकसित देशों की राह नहीं लेने के लिए प्रतिस्पर्धात्मक लाभ है" प्रिंसिपल वैज्ञानिक पासी वैइनीका कहते हैं।

भारत में मुख्यत: तीन ऋतु माने जाते है। उनमें जो बारिश का मौसम रहता है, उस अवधि में कम सौर ऊर्जा उत्पादित होती है। अक्षय ऊर्जा प्रणाली में सौर ऊर्जा की कमतरता, हवा का जोर बढना और भारी वर्षा के कारण जो जलस्त्रौत बहने लगते उससे ऊर्जा तैयार कर सकते है। और भी जरुरज हो तो बारिश स॓ कम प्रभावित पड़ोसी राज्यों से बिजली ले सकते है। इस प्रकार बरसात के मोसम में ऊर्जा प्रणाली कार्यात्मक रहता है।

प्रस्तावित अक्षय ऊर्जा प्रणाली यह वर्तमान में भारत में उपलब्ध बिजली प्रणाली की अपेक्षा में सस्ती है। प्रस्तावित अक्षय ऊर्जा प्रणाली के खर्चे के बारे विचार करते है, तो 2050 में केवल ऊर्जा विभाग को देखते है, 3640 भारतीय रुपये मूल्य होगा (हर MWh) याने (52 युरो)। सागर जल अलवणीकरण और औद्योगिक वायु क्षेत्र की बात सोचते है तो उसका खर्च 3220 भारतीय रुपये (46 युरो) प्रति मेगावॅट-घंटा (MWh) है, उसके बदले में वर्तमान प्रणाली की लागत 57 युरो प्रति मेगावॅट है।

भारत को यह लक्ष्य हासिल करने के लिए सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और तंत्रज्ञान में निवेश (पैसे) करने की आवश्यकता है। कुल निवेश की आवश्यकता लगभग 3380 अब्ज युरो इतना होगा। भारत में बिजली की मांग 2015 में 1720 दशलक्ष MWh थी, वह 2050 में 6200 दशलक्ष MWh होने की संभावना है।

प्रस्तावित ऊर्जा प्रणाली अंत उपयोगकर्ताओं के लिए सौर स्व-उपभोग बनाता है जैसे घरेलु, कंपनिया और उद्योग वे तथाकथित पीव्ही प्रोसुमरर्स हैं। ये पीव्ही प्रोसुमरर्स एक अधिक वितरित और लचीले ऊर्जा प्रणाली बनाने के द्वारा बिजली आपूर्ति अंतर को बंद कर सकते है। प्रोस्यूमर्स भारत की कुल बिजली की मांग का लगभग 15-20 प्रतिशत योगदान कर सकते है। यह इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक तेज़ संक्रमण को भी सक्षम कर सकता है, जिसे सरकार द्वारा एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य के रूप में स्थापित किया गया है।

"भारत की बढ़ती बिजली की मांग और गर्मी में होनेवाले बिजली की कमी के साथ लगातार आपूर्ति मांग की खाई को देखते हुए, सौर पीवी प्रोसुमरर्स को पूरी तरह से टिकाऊ ऊर्जा प्रणाली में देश के संक्रमण को सक्षम करने में महत्वपूर्ण भूमिका होगी," प्रोफेसर क्रिश्चियन ब्रेयर का कहना है।

प्रस्तावित अक्षय ऊर्जा प्रणाली से कई तरीकों से भारत लाभान्वित होगा। सबसे पहले, यह देश को इसके हवामान परिवर्तन लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगा। दूसरे, पूरी तरह अक्षय ऊर्जा प्रणाली में जाने से स्वास्थ्य की स्थिति में भी सुधार आएगा।

"सुधारित वायु के क्षमता से आरोग्य का खर्च एवं पूर्व प्रौढ मृत्यु प्रमाण कम होगा" शोधकर्ता आशीष गुळगी कहते हैं।

यह पहली बार है जब शोधकर्ताओं ने घंटे के रिज़ॉल्यूशन पर और उच्च भौगोलिक विस्तार में 100% अक्षय ऊर्जा के प्रति भारत के संक्रमण का प्रदर्शन करने में सक्षम किया है।

यह शोध फिनिश सोलर रेवोलुशन और निओ-कार्बन ऊर्जा अनुसंधान परियोजना के भाग के रूप में किया गया था। निओ-कार्बन ऊर्जा अनुसंधान, लाप्पीनरान्टा यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (LUT), वीटीटी टेक्निकल रिसर्च सेंटर फिनलैंड लिमिटेड और टूर्कू विश्वविद्यालय, फिनलैंड फ्यूचर्स रिसर्च सेंटर (FFRC) के सहयोग से किए गए टेकेस के रणनीतिक अनुसंधान में से एक है।

 

अधिक जानकारी:

Christian Breyer, Professor, LUT, christian.breyer@lut.fi, +358 50 443 1929

Pasi Vainikka, Principal Scientist, VTT, pasi.vainikka@vtt.fi, +358 40 5825 987

Ashish Gulagi, Doctoral Researcher, LUT, ashish.gulagi@lut.fi, +91 7507735375

 

प्रकाशन:

The Demand for Storage Technologies in Energy Transition Pathways Towards 100% Renewable Energy for India, http://bit.ly/2vSldF1

Electricity system based on 100% renewable energy for India and SAARC, http://bit.ly/2wmRUd0

Solar-Wind Complementarity with Optimal Storage and Transmission in Mitigating the Monsoon Effect in Achieving a Fully Sustainable Electricity System for India, http://bit.ly/2xcwVdP

Role of solar PV prosumers in enabling the energy transition towards a fully renewables based power system for India, http://bit.ly/2xaP2Ab